22 अप्रैल, 2025
आचार्य चाणक्य ने कहा है कि “इससे पहले समस्या तुम्हे समाप्त कर दे, तुम समस्या को समाप्त कर दो।" जम्मू-कश्मीर में हमले इस्लामिक धार्मिक हमले हैं जो हमले करते हैं वह इस्लामिक सैनिक हैं। कब तक अपने आप को गुमराह रखोगे और हिन्दू समाज की बलि चढ़ाते रहोगे। हाल ही में आतंकियों पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने हिन्दू यात्रियों को मार दिया जिसमें दो साल का एक बच्चा भी मार दिया जाता है। जम्मू-कश्मीर में आतंकी अटैक यह नहीं रुकेगा, यह नहीं रुकेगा क्योंकि यह पैंतीस साल से नहीं रुका है जब तक भारतीय सेना लाइन ऑफ कंट्रोल पार नहीं करेगी, जम्मू-कश्मीर में निर्दोषों का खून बहता रहेगा। हाल ही में तीन दिन में तीन हमले पहले कठुआ में एक सिविलियन पर हमला होता है उसके एक दिन बाद नौ यात्रियों को मार दिया जाता है जिसमें शामिल एक दो साल का बच्चा और अब डोडा में अटैक एक आर्मी कैंप में जिसमें पाँच फौजी घायल और एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर घायल हो जाता है और सेना के वाहन पर आतंकी हमला होता है और हमारे पाँच जवान शहीद हो जाते हैं और कई घायल हो गए। यह क्या हो रहा है? यह क्या हो रहा है और इसके लिए हमें क्या करना पड़ेगा, इसके पीछे पाकिस्तान की एक बड़ी थ्योरी है। मैं आपसे बताना चाहता हूं यह पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद नहीं रुकेगा। पहले हम सबको बैठ के आपको और मुझे यह मानना पड़ेगा कि यह आतंकवाद नहीं रुकेगा क्योंकि यह पैंतीस साल से नहीं रुका है, अगर किसी को यह गलतफहमी है कि अगले एक साल में रुक जाएगा,नहीं! क्या कश्मीर में स्थिरता आई है बिल्कुल इसमें कोई शक नहीं है कि आर्टिकल 370 और 35 ए हटने के बाद कश्मीर का इलाका नॉर्थ ऑफ पीर पंजाल और जियोग्राफिक स्पेसिफिक हियर नॉर्थ ऑफ पीर पंजाल में कुछ स्थिरता आई है, लेकिन वहां पर जो स्थिरता आई है वहां पर भारतीय सेना ने शानदार काम किया है, आतंकवादियों पर सेना का बनाया हुआ यह प्रेशर शिफ्ट हुआ है और यह शिफ्टेड एरिया अब नॉर्थ ऑफ पीर पंजाल से अब साउथ ऑफ पीर पंजाल शिफटेड हो गया है ताकि वहाँ हिन्दू –बाहुल क्षेत्रों में हिंदुओं पर आतंकी हमले किए जाएं और आतंकी हमलों के डर से कश्मीरी पंडितों की तरह पलायन को मुजबूर हो जाएं, यह पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों के आकायों और पाकिस्तानी सेना की चाल है।
आपने पहले भी देखा होगा कि इस शिफटेड एरिया में आतंकी अटैक रजौरी के एरिया में अटैक अभी कुछ समय पहले हुआ था जिसमें हमारे पांच फौजी भाई वीरगति को प्राप्त हो गए थे। यह हमारी सेना के स्पेशल फोर्सेस यूनिट पर अटैक हो रहा था। यह लगातार क्यों हो रहा है इसका कारण क्या है? लोग कहते हैं कि सरकार आतंकी हमलों को नहीं रोक पा रही है,लोग कह रहे हैं कि आतंकी हमलों से निपटने के लिए कुछ और करना पड़ेगा, कोई कहता है यह कर दो, कोई कहता है ये कर दो। आज मैं आपको बताता हूं पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए एक्चुअली होना क्या चाहिए। गुरु गोबिंद सिंह जी एक महान योद्धा होने के साथ-साथ महान विद्वान भी थे। वह ब्रज भाषा, पंजाबी, संस्कृत और फारसी भी जानते थे। जब औरंगजेब के अत्याचार सीमा से बढ़ गए तो गुरुजी ने मार्च 1705 को एक पत्र भाई दयाल सिंह के हाथों औरंगजेब को भेजा। इसमें उसे सुधरने की नसीहत दी गयी थी। यह पत्र फारसी भाषा के छंद-शेयरों के रूप में लिखा गया था। इसमें कुल 134 शेयर हैं। इस पत्र को ‘जफरनामा’ कहा जाता है, जिसे गुरु जी ने अपने मोगा जिले के गांव दीना साहिब में पड़ाव के दौरान लिखा था। सिख विद्वान कहते हैं कि यद्यपि यह पत्र औरंगजेब के लिए भेजा गया था लेकिन इसमें जो उपदेश दिए गए हैं वह आज भी हमारे लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इसमें औरंगजेब के अलावा इस्लाम, कुरान, और मुसलमानों के बारे में जो लिखा गया है, वह हमारी आंखें खोलने के लिए काफी है ।
इसीलिए ‘जफरनामा’ को धार्मिक ग्रंथ के रूप में स्वीकार करते हुए दशम ग्रंथ में शामिल किया गया है। ‘जफरनामा’ का उपदेश पढ़कर औरंगजेब हो गया था गमजदा, बाद में उसकी मौत हो गई थी। आनंदपुर साहिब का किला छोड़ने के बाद माछीवाड़े के जंगलों से होते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह मोगा जिले के गांव तख्तूपुरा साहिब में पहुंचे थे, जहां उनसे पहले अपने समय में श्री गुरु नानक देव और सिखों के छठें गुरु हरगोबिंद साहिब भी अपने चरण डाल चुके थे। वहां कुछ समय रुकने के बाद उन्होंने मोगा जिले के ही गांव दीना साहिब में कई दिन पड़ाव किया। इस दौरान उन्हें दो छोटे साहिबजादों के दीवार में चुनवाए जाने का समाचार मिला। अपने दो बड़े बेटों की जंग में शहादत, माता की मौत और दो छोटे साहिबजादों की शहादत के बाद भी ना टूटने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह ने दीना साहिब में फारसी में छंदों में औरंगजेब को पत्र लिखा। इसे ‘जफरनामा’ (फहतेनामा) कहा जाता है। इस पत्र में उन्होंने औरंगजेब व मुगल हुकूमत की सभी काली करतूतों का जिक्र किया। इस पत्र में उन्होंने उसे आईना दिखाया। इतिहासकार लिखते हैं कि इस पत्र को पढ़ने के बाद औरंगजेब ने गुरु गोबिंद सिंह से मिलने की इच्छा भी प्रकट की थी। परंतु वह इतना शोकाकुल हो गया था कि उसकी मौत हो गई। औरंगजेब के बाद उसका बेटा बहादुरशाह जफर हिंद का शहनशाह बना और उसने श्री गुरु गोबिंद सिंह से सुलह तो की परंतु गुरुजी ने उसके पूर्व मुगल काल के अंत की बात कही थी और इसके बाद मुगल शासन का अंत हो गया।
यह पत्र उल्लेख करता है कि सन 1705 की बात है गुरु गोविंद सिंह जी महाराज औरंगजेब की फौज से लड़े थे। यह ‘चमकौर साहिब की लड़ाई’ के नाम से भी इतिहास में जानी जाती है। इस लड़ाई के बाद गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने ‘जफरनामा’ नाम की एक कविता लिखी थी। यह फारसी में लिखी गई थी। इस कविता के माध्यम से गोविंद सिंह जी महाराज की ओर से मुगल बादशाह को एक पैगाम था, एक मैसेज था। इस कविता में ऐसी-ऐसी पंक्तियाँ लिखी गईं हैं जिनको अगर आप सुनेंगे तो आपको लगेगा कि यह फैंटास्टिक पीस ऑफ पोएट्री और वेरी सेंसिबल डिप्लोमेटिक डॉक्यूमेंट है। मुझे यह नहीं समझ में आ रहा कि इंडियन आर्म्ड फोर्सेस में या फिर जो फॉरेन पॉलिसी पढ़ते हैं उनके लिए यह कृति मैंडेटरी रीडिंग क्यों नहीं है, क्यों नहीं उनको बोला जाता कि तुम इसे पढ़ोगे और तुम इसका बुक रिव्यू लिखोगे। मुझे अभी तक समझ में नहीं आया कि हम भारत के लोग इस कृति का रिव्यू क्यों नहीं करते। मुगल सम्राट द्वारा नैतिक संहिता के इस उल्लंघन के बाद गुरु गोबिंद सिंह ने फारसी में ‘ज़फरनामा’ (विजय पत्र) लिखा। 111 छंदों में से गुरु गोबिंद सिंह ने 34 छंद भगवान की स्तुति के लिए समर्पित किए हैं। छंद 19 से 41 तक, उन्होंने वर्णन किया है कि युद्ध कैसे हुआ।
वे लिखते हैं:वे (शत्रु) काले कपड़े पहने हुए हैं और मक्खियों की तरह हैं, अचानक बहुत शोरगुल के साथ आया। अपने और अपने लोगों पर मुगल सेना के हमले का वर्णन करते हुए, वह बार-बार जोर देकर कहते हैं कि औरंगजेब ने कुरान पर जो शपथ ली थी, उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं थी। ‘ज़फरनामा’ की सभी आयतों में से 15 में गुरु और उनके परिवार को सुरक्षित मार्ग देने के अपने वादे को तोड़ने के लिए औरंगजेब की आलोचना की गई है। गुरु जी आगे लिखते हैं: चंद चिंगारियाँ बुझाकर तुमने कितनी मर्दानगी दिखाई है, तुमने आग को और भी तेज और उग्र बना दिया है। हालाँकि, उन्होंने औरंगज़ेब की प्रशंसा में कुछ पंक्तियाँ भी लिखीं जो हमें बताती हैं कि कैसे वह सम्राट को उसकी दमनकारी नीति से अलग करने में सक्षम थे:औरंगजेब बादशाहों का बादशाह और बहुत समृद्ध था, वह एक अच्छा तलवारबाज और फुर्तीला घुड़सवार है। यह बात सर्वविदित है कि अनुवाद में अर्थ खो जाता है।
मूल रूप से फ़ारसी में लिखी गई ‘ज़फ़रनामा’ के कई अनुवाद हुए हैं। इसका सबसे पहले पंजाबी में अनुवाद किया गया था। बार-बार अनुवाद करने से एक-दूसरे से तुलना करने पर एक ही अर्थ का पता नहीं चल पाता। राजनयिक और लेखक नवतेज सरना ने हाल ही में इस पाठ का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। एक साक्षात्कार में सरना ने कहा , "इसमें परस्पर विरोधी विचार और परस्पर विरोधी व्याख्याएं हैं।
मुझे विभिन्न संस्करणों, सिख इतिहास और अनुवादों पर टिप्पणियों में से मूल का सही पाठ प्राप्त करना था। मैं बहुत ज़्यादा भटक नहीं सकता था, लेकिन मुझे पद्य के लिए शाब्दिक पाठ से बहुत ज़्यादा विचलित हुए बिना पाठ के करीब रहना था।"
उन्होंने बताया कि प्रतिलेखन के साथ-साथ अक्सर “लेखकों द्वारा भौतिक परिवर्तन भी किए जाते थे, कभी-कभी किसी विशेष ऐतिहासिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करने के लिए”। प्रत्येक अनुवाद के साथ, जिससे ‘ज़फ़रनामा ‘ गैर-फ़ारसी भाषी लोगों के लिए भी सुलभ हो गया, इसका सटीक अर्थ भले ही लुप्त हो गया हो, लेकिन इसका सार अभी भी वही है। यह फारसी में है, इसका मतलब क्या है? संक्षेप में, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज क्या कह रहे हैं,यहां पर वो यह कह रहे हैं कि “जब कोई भी प्रॉब्लम हो, कोई भी समस्या हो उसका शांति से हल करने की कोशिश करो, लेकिन एक ऐसा समय आता है जब शांति से उस चीज या समस्या का हल नहीं हो पाता है तो उस समय आपको तलवार उठानी पड़ती है।“ मैं थोड़ा-सा इतिहास में जाता हूँ, फिर मैं वर्तमान संदर्भ में भी आऊंगा। एक अंग्रेजी में कहावत है: ‘कमत द आर, कमत द मैन।‘ इसका मतलब है जब कोई समस्या आती है तो उस समस्या से निपटने के लिए समय के साथ कोई महामानव भी बाधाओं से जूझकर विजय दिलाता है। जब हम बात करते हैं पृथ्वीराज चौहान की, जब हम बात करते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज की, जब हम बात करते हैं गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की, ये लोग कौन थे। समय ऐसा था जब जुल्म इतना बढ़ गया था, इतना ज्यादा जुल्म बढ़ गया था जब भारत में मुगल शासन था, जब नॉर्थ और नॉर्थ-पश्चिम से आक्रांता आ रहे थे, इस्लामिस्ट आक्रमकारी जो हिंदुओं के गांव के गांव साफ कर देते थे। जब जुल्म बढ़ जाता है तो तब ऐसे युग पुरुष पैदा होते हैं।
ठीक ही कहा है “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमअधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे!” जब-जब जुल्म बढ़ता है, तब-तब धरती पर माहपुरुष अधर्म का विनाश करने के लिए अवतरित होते हैं जिन्हें प्रभु पापियों का सर्वविनाश के लिए भेजते हैं। हम कश्मीर में 35 साल से ऑपरेशन कर रहे हैं। कश्मीर में हमने हजारों आतंकवादी मार दिए। राष्ट्र राइफल्स ने अकेले कितने मार दिए। लेकिन कभी हमने बैठ के एक बार सोचा कि ये क्यों हो रहा है बार-बार, क्यों हम लोग आतंकवादी मारते हैं, फिर पैदा हो जाते हैं, फिर मारते हैं, फिर पैदा हो जाते हैं, फिर मारते हैं, फिर पैदा हो जाते हैं और ये सिलसिला कब रुकेगा। आखिरी समस्या का हमेशा के लिए कब निदान होगा और सरकारों को इसका एक बार ही हल निकालना चाहिए ताकि आतंकवाद में लोग न मारे जाएं और न आतंकवादी बार-बार मरने के लिए जम्मू-कश्मीर आएं। हम लोग आतंकवाद को लेकर बातें करते हैं, कब से चीख रहे हैं क्योंकि हम लोग गलत प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं। जब तक आप लाइन ऑफ कंट्रोल पार नहीं करेंगे कश्मीर में निर्दोषों का खून बहता रहेगा। आप लाइन ऑफ कंट्रोल मत पार करिए, अगले 50 साल तक आप ऑपरेशन करते रहिए, 50 साल तक पाकिस्तान से आतंकवादी आएंगे यात्रियों और निर्दोषों को मारेंगे, फौजियों को मारेंगे, पर्यटकों को मारेंगे, फिर से कश्मीरी पंडितों का नरसंहार होगा। यह सारा लूप रिपीट होता रहेगा। अब इसके दो-तीन कारण हैं।
पाकिस्तान ऐसा करता क्यों है? ये तो आप जानते ही हैं कि पाकिस्तानी फौज लड़ना नहीं चाहती है और न तो लड़ सकती हैं तो पाकिस्तान फौज ने भारत के खिलाफ अपने आतंकवादियों को लड़ने और मरने के लिए पैसा देकर आउटसोर्स कर दिया और खुद पाकिस्तानी फौज के जनरल बैठ गए लंदन में, दुबई में पैसा कमाने के लिए। पाकिस्तान के पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ ने जब आखिरी सांसें पाकिस्तान में नहीं ली बल्कि उसने अपनी आखिरी सांसें दुबई में ली थी और और पाकिस्तानी सेना के दूसरे जो जनरल हैं वह अपनी आखिरी सांसें पाकिस्तान में नहीं लेंगे, कोई ऑस्ट्रेलिया में बैठा है, कोई सऊदी अरब में बैठा है, कोई लंदन में बैठा है, कोई फ्रांस में बैठा है, कोई बेल्जियम में बैठा है। ये सभी बाहर बैठे हैं, सब के सब ये रिमोट कंट्रोल से पाकिस्तान को चलाते हैं। यह पहला कारण है। दूसरा कारण, पाकिस्तान को यह पता है कि उसकी किस्मत तभी बदलेगी जब भारत के साथ उसकी बातचीत होगी, भारत के साथ रिश्ते नॉर्मलाइज होंगे। रिश्ते पाकिस्तान ने खराब करे भारत ने नहीं करे, लेकिन अब पाकिस्तान को एहसास हो गया है क्योंकि उसकी इकॉनमी/अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है, आर्टिफिशली उसकी इकॉनमी को सपोर्ट करा जा रहा है, कभी इससे रुपये ले लिए, कभी इससे रुपये ले लिए, ऐसे पाकिस्तान की इकॉनमी/अर्थव्ययवस्था चल रही है, पाकिस्तानी इकॉनमी अंदर से खोखली हो चुकी है, बिल्कुल यह मजबूत इकॉनमी/अर्थव्यवस्था नहीं है ।
पाकिस्तान खुद एक पाई भी कमाने की क्षमता नहीं रखता। अगर पाकिस्तान भीख नहीं मांगेगा तो पाकिस्तान खाएगा क्या और अपनी जनता को खिलाएगा क्या, वैसे भी पाकिस्तान की जनता भुखमरी से मरी जा रही हैं और आधारभूत मांगें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। पाकिस्तान अटैक क्यों कर रहा है? पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी अटैक करवाने के कई कारण हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर में हिन्दू-नफरत भी शामिल है ताकि जितने भी हिन्दू लोग जम्मू-कश्मीर में वे डर के मारे निकल के भाग जाएं, जैसे कश्मीर वैली से पंडितों को निकाला था। अब जम्मू के जितने हिंदू हैं इनके ऊपर इतने अटैक करो कि यहां से पलायन शुरू हो जाए। यह सब एक बहुत बड़ा पाकिस्तान का प्लान है, लेकिन एक और बात यह है कि किसी तरीके से भारत को मजबूर कर दो कि भारत नेगोशिएशन टेबल पर आ जाए, इतना निर्दोष लोगों का खून बहाओ कि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर एक मुद्दे के साथ मानव अधिकारों का भी मुद्दा बनें। तीसरा कारण, इंडियन आर्मी ने बहुत सारे ट्रूप्स चीन के सामने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तैनात कर दिए हैं, उनकों चीन बॉर्डर से भटकाना है ताकि अधिक भारतीय फौज जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने में लगी रहे और इधर चीन आसानी से भारत के क्षेत्र में घुसपैठ कर सके। जब कोविड हुआ था तो दो साल तक भारतीय फौज में भर्ती नहीं हुई थी क्योंकि लॉकडाउन था तो आज की तारीख में ट्रूप्स की कमी है, उसको अलग-अलग स्कीम द्वारा पूरा करा जा रहा है, लेकिन आज की तारीख में और आपके साथ द लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर आमना-सामना हो रहा है।
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल 3500 किलोमीटर से ज्यादा लंबी है और कई स्टेट से यूनियन टेरिटरी से गुजरती है जबकि लाइन ऑफ कंट्रोल 750 किलोमीटर लम्बी है। अगर आपको द लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल में ट्रूप्स का सैचुरेशन करना है तो आपको कहीं न कहीं से तो अपने यूनिफॉर्म फोर्स को निकालना है यानि फोर्स को एक जगह से कम करना होगा चाहे जम्मू-कश्मीर की ओर से कम किया जाए या फिर किसी अन्य बॉर्डर क्षेत्र से फोर्स को कम कर द लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तैनात किया जाए। फिर क्या होगा, चाइना पाकिस्तान को बोलेगा इंडिया में जाकर खून बहाओ, एक माहौल बनाओ कि जम्मू में प्रॉब्लम है, जम्मू में ट्रूप्स चाहिए ट्रूप्स आएंगे, कहां से ये आएंगे, कहां से ट्रूप्स फिर से आपको लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से हटाने पड़ेंगे क्योंकि नए जो आप सिपाही ले रहे हैं उनको तो ट्रेनिंग देने में वक्त लगेगा और वक्त आपके पास है नहीं। तो ये चार पांच-कारण हैं जिसकी वजह से पाकिस्तान यह लगातार दर-लगातार करवा रहा है और वो बात तो है कि किसी तरीके से भारत के साथ बातचीत शुरू हो और जब भारत के साथ नेगोशिएशन हो। मैं साफ व सीधी बात करता हूँ कि भारतीय सेना एंटी टेरर ऑपरेशन कर रहे हैं, जम्मू -कश्मीर में वह करते रहिए, उसमें मत रुकिए, लेकिन एंटी टेरर ऑपरेशन और ट्रूप्स बढ़ाने की जरूरत है। कहीं न कहीं आपको यह समझना पड़ेगा कि अब भारतीय सेना की दो चीजें करने की पक्की मजबूरी बन गई है, नंबर वन यह जो हमारे दिमाग में गलतफहमी है कि ‘द लाइन ऑफ कंट्रोल’ पार नहीं कर सकते नहीं तो सीजफ़ायर का उल्लंघन होगा, यह सब बकवास है।
अब ब्रिगेड कमांडर्स बटालियन को ‘द लाइन ऑफ कंट्रोल’ क्रॉस करनी ही होगी और आपको हॉट परस्यूट करना होगा और अक्रॉस द बॉर्डर ऑपरेशन प्लान करके ठोको पाकिस्तानी पोस्ट पर किसने मना करा है, किसने मना करा है, यूनाइटेड नेशंस वाला वहां पर आकार तुम्हें मना नहीं कर रहा है, ठोकते रहो जब तक पाकिस्तानी सेना और इनके आतंकवादियों के होश फक्ता न हो। देखो, सीधी-सी बात है आज की तारीख में आप पाकिस्तानी आर्मी के ऊपर प्रेशर नहीं डाल रहे, आतंकी संगठन लश्कर तैयबा और जैस-ए-मूहम्मद के ऊपर प्रेशर डाल रहे हो, उनको फर्क नहीं पड़ रहा है, आप इनके 10000 आतंकी मार दो, फिर वे 10000 और पैदा कर लेंगें। पाकिस्तानी जिस रेट से बच्चे पैदा करते हैं और जिस रेट से वह बच्चे आतंकवादी बनते हैं तुम इस खेल में इन्हें हरा नहीं सकते क्योंकि भारत में यह असंभव हैं। पाकिस्तान में इनकी जनसंख्या बढ़ रही और जाहिल पैदा कर रहे हैं।
यही जाहिल मदरसे में जाते हैं, वहां पर पता नहीं क्या उटपटांग सीखते हैं। जाहिल इंसान अंदर जाता है, बारूद बनके बाहर आता है, यह फटते रहते हैं और यह चलता रहेगा। पहली चीज लाइन ऑफ कंट्रोल पार करनी होगी, नंबर टू जो हमने सीज फायर माना था जनरल कमर बाजवा के कहने पर वो बातचीत हमें खत्म कर देनी चाहिए, हम लोग क्यों अटके हुए हैं सीज़फायर, पर मुझे नहीं पता जनरल कमर जावेद बाजवा की एक मजबूरी थी उस समय उनको लगा कि जो लाइन ऑफ कंट्रोल है उस पर पाकिस्तानी फौज ज्यादा चाहिए क्योंकि पाकिस्तान को इस लाइन ऑफ कंट्रोल से ज्यादा खतरा है। अगर हमारी जगह पाकिस्तान होता तो वह भारत की तरह नहीं सोचता। पाकिस्तान यह कहता है कि भारत को और कैसे कष्ट हो और कैसे परेशानी हो, भारत को किस तरीके से और मुश्किलात में डाले चलो इसकी प्लानिंग करती है पाकिस्तान की सेना और वो करती चली आ रही है। हम भारत के लोगों ने शराफत में मान लिया कि हाँ ठीक है कोई बात नहीं लाइन ऑफ कंट्रोल पर शांति होनी चाहिए। अगर लाइन ऑफ कंट्रोल पर शांति है तो फिर हमने लाइन ऑफ कंट्रोल पर फोर्स क्यों रखी है, वहां पर आप फोर्स के साथ बोफोर्स लगाइए, आप पिनाका लगाइए, आप एमबीआरएल (मल्टी बेरल रॉकेट लोर्न्चर ) लगाइए, आपके पास लाइन ऑफ कंट्रोल पर जू-23 हथियार , आप जू -23 हथियार खोल दीजिए पाकिस्तानी पोस्ट की तरफ, जब जू 23 हथियार चलती है तो लगता है कि उस्ताद जाकिर हुसैन तबला बजा रहा है।
आप जब तक लाइन ऑफ कंट्रोल पर आग नहीं लगाएंगे कश्मीर में शांति नहीं होगी। अगली बार आप सर्जिकल स्ट्राइक करें। आप लश्कर तैयब और जैसेमोहम्मद पर अटैक करें या न करें उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता, वह जियें-मरें हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। सीधी सी बात है कि आप पाकिस्तान और कश्मीर में बैठे आतंकवाद के आकाओं पर अटैक करें । जब तक आप इन आकाओं और पाकिस्तानी आर्मी को टारगेट नहीं करते, तब तक जम्मू-कश्मीर में शांति नहीं हो सकती। यह बात समझने वाली है जो समस्या पाकिस्तान के रावलपिंडी से ऑपरैट हो रही है आप उसका समाधान श्रीनगर और जम्मू में क्यों ढूंढ रहे हैं और 35 साल से ढूंढ रहे हैं, आपको समस्या का आज तक समाधान नहीं मिला क्योंकि प्रॉब्लम है ही नहीं। यहाँ की प्रॉबलम ये है कि आपको कश्मीर में डीरेडिकलाइजेशन करना है, डी-एडिक्शन सेंटर खोलने हैं, सिविलियन गवर्नमेंट को बोलना है कि इन दो कामों में लग जाए डी-एडिक्शन सेंटर्स, डी-एडिक्शन सेंटर खोलना। ड्रग-एडिक्शन यह पूरा नारको टेरर का जो गेम है कश्मीर के अंदर और पंजाब के अंदर या दो बॉर्डर राज्य हैं जहां पर अधिकतम ड्रग्स है। इंडिया में ऐसी बात नहीं है कि उत्तर प्रदेश में ड्रग्स नहीं है, अब बेंगलोर में नहीं है या केरला में नहीं है या मणिपुर में नहीं है या महाराष्ट्र में नहीं है, दिल्ली या हिमाचल में नहीं है, बिल्कुल हर जगह है, लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि जितनी संगीन प्रॉब्लम जितनी बड़ी परेशानी पंजाब में है, जितनी बड़ी परेशानी कश्मीर में है और कहीं नहीं है इंडिया में, मैं यह कह रहा हूँ कि समस्या का स्तर अधिकतम पंजाब में है, जम्मू-कश्मीर में और यह क्यों है, इसलिए ये सारा का सारा ड्रग्स का आतंकवाद बॉर्डर पार से हो रहा है और ये स्टेट्स और ज्योग्राफी का खेल है जो पाकिस्तान खेल रहा है। भारत को बहुत पहले ओमान ने ऑफर करा था कि ग्वादर पोर्ट ले लो लेकिन भारत ने मना कर दिया और पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट ले लिया जबकि पहले भारत को ऑफर करा गया था।
अगर भारत ने उस समय सोच लिया होता कि ठीक है हम ग्वादर पोर्ट ले लेते हैं, ओमान से हम खरीद लेते तो ग्वादर पोर्ट आज की तारीख में बलूचिस्तान एक आजाद देश होता, हमने नहीं करा क्योंकि यह हिस्टोरिकल गलती थी। अगर हमने यह गलती नहीं की होती तो हमसे गलती हुई क्योंकि तब हमारा बॉर्डर बलूचिस्तान से मिलता। हाँ, टैक्टिकल लेवल पर आर्मी को फ्री हैंड दे दिया है। क्या ऑपरेशनल लेवल पर भारतीय सेना को फ्री-हैंड दे दिया है? बिल्कुल 100% फ्री- हैंड दे दिया है, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन क्या स्ट्रेटेजिक लेवल पर फ्री हैंड है, नहीं, और होना भी नहीं चाहिए क्योंकि भारतीय सेना सरकार नहीं चलाती है। स्ट्रेटेजिक लेवल पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से आदेश आना चाहिए। मुझे पूरा यकीन है कि जम्मू में बढ़ रही आतंकी घटनाओं पर नुकेल कसने और आतंकवादियों के संपूर्ण खात्मे के लिए अगले दस-पंद्रह दिनों में कुछ न कुछ होगा, लेकिन जो भी यह स्ट्रेटेजिक/योजनाबद्ध प्लान कर रहा होगा देश हित , मानव हित और पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का फण कुचलने के लिए तो कर ही रहा होगा।
आतंकी संगठनों को छोड़िए, पहले पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और आतंकी ट्रैनिंग के मदरसे से निपटना चाहिए क्योंकि ये ही तो इन जहरीले सांपों के मुखिया हैं, इनका फण कुचल दिया तो ये जहरीले सांप अपने-आप मर जाएंगें। जब तक आप डायरेक्ट इन सांपों के मुखियों को टारगेट नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं सुधरने वाला। आप सौ बार सर्जिकल स्ट्राइक कर लो, कुछ नहीं होने वाला क्योंकि आप सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे हो, जैश मोहम्मद को ठोक दिया बाला कोट में, तीन सौ आतंकी मार दिए, तो फिर क्या हो गया, फिर आतंकी जम्मू-कश्मीर में आ रहे हैं, आम नागरिकों और सेना पर हमले कर रहे हैं, मार भी रहे हैं और मर भी रहे हैं। आप तीन सौ नहीं, आप तीन हजार आतंकी मार दो, जैश मोहम्मद वाले तो क्या, लाखों मदरसे हैं पाकिस्तान में, एक मदरसा एक साल में एक बंदा देगा, सौ साल की पाइपलाइन है इन मदरसों के पास क्योंकि पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री चलाने में दुनिया में एक्सपर्ट है। यहीं से पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तानी सरकार और मदरसों के मालिकों और मौलबियों की रोजी-रोटी और ऐशोआराम की दुकान चल रही हैं और गरीब, अनपढ़ पाकिस्तानी परिवारों के युवा इस दुकान के बिकने वाले प्रोडक्ट हैं जो जम्मू-कश्मीर में ऐक्सपायर हो जाते हैं क्योंकि पाकिस्तानी जनता को जम्मू-कश्मीर के नाम पर गुमराह किया जाता है और आतंकवाद में धकेला जाता है।
आखिरी पाकिस्तान में यह आतंकवाद की फैक्ट्री और दुकान कब तक चलती रहेगी और जम्मू-कश्मीर में कब पूर्ण रूप से शांति आएगी? यह तो सरकार ने निर्णय लेना है, लेकिन अब आतंकवाद का पक्का इलाज करना है, इलाज की कड़वी दवाई है, लेकिन दवाई सिर्फ एक ही है, बाकी सारी दवाइयां आप पैंतीस साल से ट्राई कर रहे हैं, अब ऐलोपैथिक बची है इसे भी ले लो, यूनानी मेडिसिन भी ले लो, ऐसा कर लो, वैसा कर लो आयुर्वेदिक तो सब ट्राई कर रहे हो, आप इस बार जो दवाई हम कह रहे हैं, यह भी एक बार आप दवाई ट्राई करके देख लो। यह इंट्रावेनस डोज है, रोगी चौबीस घंटे के अंदर खड़ा हो जाएगा।



